कुछ समझ नहीं आता...
तेरा ये करीब आना... आके फिर दूर चले जाना...कुछ समझ नहीं आतातेरा ये हसना... हस्ते हस्ते फिर रो जाना...कुछ समझ नहीं आता
तेरा ये इस कदर क़द्र करना... और फिर बेकदर हो जाना... कुछ समझ नहीं आता
हर बात पर रुख करना... फिर बेरुखी पर उतर आना... कुछ समझ नहीं आता
तेरा ये प्यार से छूना... फिर छूने को तरसा देना... कुछ समझ नहीं आता
तेरा ये प्यार करना.. और फिर उसका मलाल करना... कुछ समझ नहीं आता
चाहती है मुझे या फिर सिर्फ मेरी ही चाह है तू... कुछ समझ नहीं आता
तेरा ये करीब आना... आके फिर दूर चले जाना...कुछ समझ नहीं आता
-: मनु शर्मा
Waahhh..... Yeh hai jordaar
ReplyDeleteलाज़बाब भाई।
ReplyDeleteJabardast bhai.
ReplyDeleteसुपर
ReplyDeleteबहुत ही अच्छा।
ReplyDelete🙌🙌🙌🙌
ReplyDeleteWah wah..
ReplyDeleteSuper duper
ReplyDeletethank you everyone with all my heart...a sincere request to all that pls login to ur gmail account before commenting so ur name could be visible 😇😇
ReplyDeleteयह आप किस संदर्भ में कहना चाह रहे हैं?
ReplyDelete–आपका अनुज "मनु शर्मा"
Shandaarr bro
ReplyDeleteWow!! Good job.
ReplyDeleteCool bro
ReplyDeleteआपका ये अथक प्रयास सार्थक एवं अनुकरणीय है।
ReplyDeleteमनु भाई.
Bahut pyaara likha
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