#लघुकथा : श्याम #भाग-१ : मीठी चाय

                                                                 लघुकथा : श्याम 
                                                               भाग-१ : मीठी चाय

नया शहर , नई नौकरी और नए लोग... इन सब के बीच भी अकेला सा महसूस कर रहा था श्याम। दिल्ली के एक सरकारी विभाग में हाल ही में छोटे बाबू के पद पर आया है श्याम। एक शाम दफ्तर मेँ अपनी कुर्सी पर बैठे हुए वह कुछ सोच ही रहा था की बगल वाली टेबल पर फाइल पटकते हुए उनके सहकर्मी पांडेय जी ने मुँह से तम्बाकू की पीक दीवार के कोने में देते हुए कहा , " अरे ! छोटे बाबू , क्या जबर मौसम  हो रक्खा है... एक-एक कप चाय और दो-दो समोसे हो जाएं। " "नहीं पांडेय जी, दरसल आज काम ज्यादा ही हो गया... फाइलें निपटाने में माथा फट सा गया है... काफी थक गया हूँ।  अब तो कमरे पर जाकर सीधा टाँगें फैलाकर सो जाऊंगा। " , श्याम ने जवाब दिया। " क्या श्याम बाबू , अभी ५ बजे ही सो जाइएगा क्या ? कोनो बात तो नहीं न। ", पांडेय जी ने चश्मा नाक पर रखते हुए पूछा।  श्याम अब चुप था और वह बिन कुछ जवाब दिए दफ्तर से कमरे की ओर निकल गया।  कमरे पर पहुँचते ही जूते खोल सीधा बिस्तर पर पसर गया।  लेकिन कमरे की खुली खिड़की से आती बाहर की ठंडी हवा ने मानो श्याम को सोने न देने का जैसे मन ही बना लिया था । वह खिड़की बंद करने को  जैसे ही बढ़ा तो पाया कि बाहर तो मौसम सच में काफी हसीन हो रहा है । श्याम को  मौसम को अनुभव करने से बेहतर थकान मिटाने का फिर और दूसरा कोई रास्ता न सूझा। वह तुरंत कमरे से बाहर गया और पास वाली टपरी पर जाकर बोला ," भईया सुनो, एक गरम चाय... और हाँ चीनी तेज़ रखना। "  जी हाँ , अभी ही कुछ देर पहले श्याम जिस चाय को न कहकर आया था अब खुद ही उस चाय तक आ गया.. अब भई, जब श्याम ने  असल में आँखें खोल के मौसम को देखा तो भला चाय की तलब से कैसे बच पाता।  " लो बाबूजी, आपकी गरमा-गरम चाय... मलाई भी मार दिए हैं  भईया जी। ", मुस्कुराते हुए चाय का कप श्याम को थमाते हुए चायवाले ने कहा।  श्याम मौसम और अपनी चाय का आनंद लेते हुए दुकान के पास ही बनी पटिया पर बैठ गया। चाय की चुस्कियां लेते हुए श्याम की नज़र सड़क पार बनी उस जूस की दुकान पर पड़ी जहाँ उसने एक ही गिलास से जूस पीते हुए एक सुंदर जोड़े को देखा और फिर न जाने क्यूँ एकाएक उसकी चाय का स्वाद फीका सा पड़ गया। " अरे भाई, तुमको कहे थे न चीनी तेज़ रखना... समझ नहीं आता क्या। " श्याम ने झुंझलाते हुए चायवाले की तरफ  देखकर कहा।  " भईयाजी , चीनी तो बरोबर है चाय में... शायद आप आज भी किसी को याद कर लिए ", चायवाले ने एक ग्राहक को सिगरेट देते हुए ज़ोर से जवाब दिया।  श्याम यह सुनकर एकदम चुप हो गया और आधी बची चाय के कप को पाटिया पर रखकर अपने बटुए से एक तस्वीर निकालकर एकाएक उसे देखने लगा। और इस हसीन मौसम ने जाने कब कातिलाना स्वरुप ले लिया श्याम भाँप ही नहीं पाया।  वो दौड़ता हुआ पास के पीसीओ बूथ पर जाकर एक नंबर घुमाने लगा। पर हर बार की तरह इस बार भी सोनम ने उसका फोन नहीं उठाया...  अब आखिर शादी जो हो चुकी है उसकी। और श्याम का दिल इस बार भी अनगिनत बार की तरह टूट गया। आँखों के जरिए बहते इस समंदर को वह फिर रोक न पाया।  श्याम के पास इस घोर अकेलेपन को दूर करने के लिए और कुछ नहीं था.... था तो बस वही आधा बचा चाय का कप। श्याम अपने आंसुओं को पोछता हुआ वापिस टपरी पर आया और पाटिया पर रखे अपने कप को उठाकर चायवाले से बोला , " दो चम्मच चीनी और...  "  चायवाले ने बिना कुछ बोले तुरंत उसकी चाय में चीनी बढ़ा दी क्यूंकि अब वह भी श्याम के दुःख को लगभग समझने लगा था... आखिर तीन महीने से रोज़ ही श्याम इसी पाटिया पर चाय का कप लिए जो बैठता था।  




 " हाँ , अब हुई न चाय मीठी... ", श्याम ने हँसकर चायवाले की तरफ कप उठाते हुए कहा।  

             -: मनु शर्मा

Comments

  1. Chai ki tarah kahani bhi achchhi thi bro..😃

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  2. chai ka to pta nhi mithi hui ya nhi pr kahani jarur mithi hain ☺️

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    1. Chai bhi mithi ho gayi thi finally....ab agle bhag me pata chalega ki dil ke feekepan ko mitane..kya sujhta hai shyam ko...😇

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  3. मनु भाई

    बैठे चाय की प्याली लेकर,
    पुराने किस्से गर्म करने।

    चाय ठंडी होती गई,
    और आंखें नम।

    -गुलजार

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  4. sard mausam ka dard bahut sundar bayan kiya

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