मगर इसका कसूरवार मैं तो नहीं...


                                         


 when she doesn't confess her love for you...

" माना दिक्क़तें बहोत हैं ज़िन्दगी में तेरी...
  मगर इसका कसूरवार मैं तो नहीं

  होता नहीं विश्वास जल्द हर किसी पे तुझे...
  पर न हो मुझ पर भी ये ज़रूरी तो नहीं

  आते हैं लम्हें हँसी के ज़िन्दगी में...
  फिर भी न हँसना कुछ सही सा नहीं 

  शायद चाहती है किसी को खुद से भी ज्यादा...
  हर बार तेरा ये छुपाना , जरुरत है.... कहीं ज़बरदस्ती तो नहीं ?

  उलझन , तड़पन , सिकुड़न , गलन... जाने क्या क्या है...
  मगर प्यार की इक ख़ूबसूरत लगन... शायद कुछ गलत तो नहीं

  माना दिक्क़तें बहोत हैं ज़िन्दगी में तेरी...
  मगर इसका कसूरवार मैं तो नहीं। "

                -: मनु शर्मा

Comments

  1. चाह कर भी ना भुला पाऊ वो
    क्यो ये सबइतना आसान नहीं।
    उम्दा वक़्त में तक जिक्र न कर सका
    लगता है कहीं कसूरवार में खुद तो नहीं

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  2. Ye kasoor mera hai ki,
    Yakin kia hai!

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  3. Areeh Sharma ji gazab hi likh diye is baar toh..
    Behad shandaar.

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