उड़ना तो चाहता था वो भी कभी...

" उड़ना तो चाहता था वो भी कभी खाव्बों के आसमान में
 पर दो वक़्त की रोटी ने उसके पर ही काट दिए।

 उसकी भी थी ख्वाहिश की हो दोस्ती किताब-ओ-दबात से कभी
 पर घर की टूटी छत ने उसके हाथ बांध दिए।                                               

 नन्हे कोमल हाथों को रंगना चाहता था वो भी स्याही से कभी
 पर बाप की फटी ज़ेब ने उसके इरादे मिटा दिए।

 ऐसा न था की माँ बाप ने चाहा नहीं कभी लाडले को लिखाना-पढ़ाना
 चाहते वो भी थे उसको लायक बनाना
 फिर याद आया उनको एक दम की रोज़ी भी तो है चलना।


 चलो छोड़ो भी ये सब...अब हम तो आगे आते हैं
 कभी उसको सपनों के...तो कभी सपनों को करीब उसके लाते हैं
 शायद इतना मुश्किल भी न हो...अगर हम चाहें तो आज दोस्ती किताबों से उसकी
कराते हैं।।। "
 


                 -: मनु शर्मा     



NOTE: If we are having good education, God has already given us a lot. A large no. of children are far away from the very basic education...please help them. Do your bit in enlightening their lives with eduction.

                                         




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